डायबिटिक फुट केयर · ग्वालियर

ग्वालियर में डायबिटिक फुट सर्जन — डॉ मनीषा सिंह

मधुमेह से जुड़े पैर के अल्सर, संक्रमण और विकृति के लिए सर्जिकल देखभाल। परामर्श Gwalior Diabetes & Foot Care Center में।

MS सर्जरी · पोडियाट्रिक सर्जरी में फेलोशिप सुबह 9:00 – शाम 6:00, प्रतिदिन

मधुमेह से जुड़ी पैर की समस्याओं में समय पर सर्जिकल जाँच सबसे ज़रूरी होती है। अल्सर जो भर न रहा हो, गहरा संक्रमण, गैंग्रीन या पैर का आकार बदलना — इनमें देर करना नुकसानदेह हो सकता है। नीचे डॉ मनीषा सिंह का परिचय और वे संकेत दिए गए हैं जिनमें तुरंत सर्जन को दिखाना चाहिए।

सर्जन

ग्वालियर में डायबिटिक फुट सर्जन

डॉ मनीषा सिंह

डायबिटिक फुट सर्जन · पोडियाट्रिक सर्जरी
  • योग्यता: MS (Surgery), Fellowship in Podiatric Surgery
  • विशेषज्ञता: डायबिटिक फुट सर्जरी, पोडियाट्रिक सर्जरी, डायबिटिक फुट अल्सर एवं घाव प्रबंधन
  • कार्यरत: Gwalior Diabetes & Foot Care Center
  • क्लिनिक: 41, City Center, Saraswati Nagar, Gwalior, Madhya Pradesh 474002
  • परामर्श समय: सुबह 9:00 – शाम 6:00, प्रतिदिन
  • क्लिनिक संपर्क: 0751 243 3363
  • Google: Google पर Gwalior Diabetes & Foot Care Center देखें →

सर्जिकल परामर्श और अपॉइंटमेंट क्लिनिक पर ही होते हैं। कृपया जाने से पहले फ़ोन करके समय की पुष्टि कर लें।

चेतावनी के संकेत

सर्जन को कब दिखाना चाहिए

इनमें से कुछ भी हो तो तुरंत सर्जन को दिखाएँ:

  • पैर का अल्सर या ऐसा घाव जो भर नहीं रहा
  • लालिमा, सूजन, गर्माहट, मवाद या गहरा संक्रमण / फोड़ा
  • काला पड़ा ऊतक (गैंग्रीन) या पैर से दुर्गंध
  • अचानक पैर में सूजन या आकार बदलना (संभावित शारको फुट)
  • हड्डी दिखना, या संक्रमण का हड्डी तक पहुँच जाना

सर्जिकल इलाज के साथ-साथ सही जूते और इनसोल से पैर पर दबाव कम रखना भी देखभाल का अहम हिस्सा है। इस बारे में क्लिनिक पर सलाह ली जा सकती है।

FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ मनीषा सिंह (MS सर्जरी, पोडियाट्रिक सर्जरी में फेलोशिप) ग्वालियर में डायबिटिक फुट सर्जन हैं और Gwalior Diabetes & Foot Care Center में कार्यरत हैं। वे पैर के अल्सर और संक्रमण सहित मधुमेह से जुड़ी पैर की समस्याओं का सर्जिकल इलाज करती हैं।

जब अल्सर भर न रहा हो, गहरा संक्रमण या फोड़ा हो, गैंग्रीन हो, शारको विकृति हो, या संक्रमण हड्डी तक पहुँच गया हो, तब सर्जिकल जाँच ज़रूरी होती है। ऐसे में देर न करें और जल्द सर्जन को दिखाएँ। साथ ही कस्टम इनसोल और डायबिटिक फुटवियर से दबाव कम रखना भी उतना ही ज़रूरी है।

मधुमेह में पैर की संवेदना कम हो सकती है, इसलिए दबाव वाली जगहें आसानी से पता नहीं चलतीं। कस्टम इनसोल और डायबिटिक फुटवियर जोखिम वाले हिस्सों से दबाव हटाकर उसे फैलाने के लिए बनाए जाते हैं और जाँच के बाद देखभाल योजना का हिस्सा हो सकते हैं। यदि पहले से घाव, लालिमा या सूजन है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएँ।